ख्वाब मे भी जीता हुं

   by   Hemant Singh      /   last updated on - June 3, 2020

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A poem expressing the inner love of a person who is waiting for his lover to come back and thinks of how will he welcome her. He thinks of how blessed he was with her . And made her his everything . He is hopeful now that she will come back one day and is living her in his dreams.
So read it , and if you have also felt that share it and show your love .


यह कविता दर्शाती है कैसे एक प्रेमी अपनी प्रेमिका का इंतज़ार करता है और उसके आने पर उसके स्वागत के बारे मे सोचता है | वह सोचता है वो कितना ख़ुशनसीब था | उसने उसे अपना सब कुछ माना | पर उसे उम्मीद है की वो वापस आएगी और वो खवाबो मैं ही उसे जीता है |
तो पढ़िए और आपने भी ऐसा मेहसूस किया हो तो अपने दोस्तों से शेयर करे और अपना प्यार जताए |

ख्वाब मे भी जीता हुं

आरास्ता है ज़िन्दगी तेरे आने से
तुझसे ही कामिल हुं मैं
सवार मुझे अपने नूर से
तेरा छुना ही काफी है

परस्तार हुं उनका
ख्वाहिश बस उससे ही करता हुं
मांगू उससे उसे हि
बस यही आस करता हुं

चाँद है वो मेरा ख्वाबो मे आया करता है
ख्वाबो मे उस संग अपनी दुनिया पिरोता हुं
की दुवा मुकम्मल हो जब भी कोई कमी न रह जाऐ
यही कोशिश मे ख्वाब मे भी उसे जीता हुं


       - हेमंत सिंह




Meaning :


  1. आरास्ता : arranged, decorated / सुसज्जित , व्यवस्थित
  2. कामिल : complete / पूरा
  3. परस्तार : adorer , devotee / उपासक, पूजनेवाला


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