बेनाम रिश्ता

   by   Yukti Agarwal      /   last updated on - July 25, 2020

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A relation is not like a straight line. It's a path of crests and thoughts.
This poem emphasizes the pain as well as the love of an unknown relation. Read and dive into that passionate ocean .

बेनाम रिश्ता

खुद गलती कर दोष हमारे सिर मंढ दिया,
हमने दिल का हाल किसी को बयां किया,
तो तुमने हमें ही बेवफा ठहरा दिया।

पहले तो रिश्ते को बेनाम क़रार किया,
फिर भी हर बार दूर जाकर पास किया,
क्यों ही तुम हमें इतना समझते गए,
जितना किसी और ने कभी तवज्जो न दिया।

आज तुम ने हम पर इतने लांछन लगा दिए,
कि हमने हमारे पल किसी और के साथ साझा किए,
क्या आपने उसके पीछे के दर्द को समझा,
बस आप तो मुख से बांण छोड़ते गए,
जो हमारे हृदय को छलनी कर गए।

आज हमारे साथ हृदय रोया, रूह भी रोई,
बस फर्क सिर्फ इतना था कि आंसू पोंछने वाला ही आंसुओं का कारण था।

माना कि हमने कभी ऐतबार नहीं किया,
लेकिन आपकी कभी परवाह न की हो ऐसा भी कभी नहीं हुआ।
याद है हमें हम मुहब्बत नहीं आपकी,
पर क्या कोई रिश्ता नहीं हमारा?

आपकी हर गलती को हमने आंख बंद कर माफ़ किया,
दिए हर उस दर्द को नजरंदाज किया।
फिर आज जब हम से खता हुई,
तो उसका परिणाम क्यों यूं हुआ।

खंजर से भी ज्यादा आपके बोल ने जख्म दिए,
कहने को तो मरहम लगा दिया,
जो वेदना हृदय को हुई उसका मोल कुछ नहीं?

याद है मुझे हर वो बात,
हर वो पल,
हर वो रात।
जरूरत नहीं थी उन बातों को, उन यादों को
किसी निर्जीव वस्तु में रखने की
फिर भी एक इच्छा थी कि
अगर तुम बदल गए तो यादें तो होंगी।

पर अब सब कुछ हृदय में सिमट गया...
कहने को तो हमने हमेशा यही कहा,
कि हमारे पास हृदय का कोई स्थान नहीं
पर आज पता चला इसके बिना हम जीवित नहीं।

एक आखिरी बात....
आपसे एक सवाल
आखिर हम आपके लिए क्या मायने रखते हैं और रखते भी हैं या नहीं
क्योंकि समझ नहीं आता हमें।
क्यों दूर जाकर भी आप इतने करीब हैं
कि पेट हमारा खाली है और बात आप तक पहुंची है।


    - युक्ति अग्रवाल






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Yukti Agarwal

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